श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  3.9.57 
যত দেন শ্রী-অদ্বৈত, প্রভু সব খায
ভক্ত-বাঞ্ছা-কল্প-তরু শ্রী-গৌরাঙ্গ-রায
यत देन श्री-अद्वैत, प्रभु सब खाय
भक्त-वाञ्छा-कल्प-तरु श्री-गौराङ्ग-राय
 
 
अनुवाद
भगवान ने अद्वैत द्वारा अर्पित की गई हर वस्तु को खा लिया, क्योंकि भगवान गौरांग कल्पवृक्ष के समान हैं, जो अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं।
 
The Lord ate everything offered by Advaita, because Lord Gauranga is like the Kalpavriksha, who fulfills all the desires of His devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)