श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.9.50 
বসিলেন গৌরচন্দ্র আনন্দ-ভোজনে
অদ্বৈত করেন পরিবেশন আপনে
वसिलेन गौरचन्द्र आनन्द-भोजने
अद्वैत करेन परिवेशन आपने
 
 
अनुवाद
तब गौरचन्द्र प्रसन्नतापूर्वक भोजन करने बैठ गये और अद्वैत उनकी सेवा करने लगा।
 
Then Gaurachandra happily sat down to eat and Advaita started serving him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)