vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा
»
श्लोक 45
श्लोक
3.9.45
সত্য গৌরচন্দ্র অদ্বৈতের ইচ্ছা-ময
একেশ্বর মহাপ্রভু করিলা বিজয
सत्य गौरचन्द्र अद्वैतेर इच्छा-मय
एकेश्वर महाप्रभु करिला विजय
अनुवाद
वस्तुतः अद्वैत की इच्छा से श्री गौरचन्द्र अकेले ही उनके घर आये थे।
In fact, Shri Gaurchandra had come to his house alone due to Advaita's wish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×