श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.9.45 
সত্য গৌরচন্দ্র অদ্বৈতের ইচ্ছা-ময
একেশ্বর মহাপ্রভু করিলা বিজয
सत्य गौरचन्द्र अद्वैतेर इच्छा-मय
एकेश्वर महाप्रभु करिला विजय
 
 
अनुवाद
वस्तुतः अद्वैत की इच्छा से श्री गौरचन्द्र अकेले ही उनके घर आये थे।
 
In fact, Shri Gaurchandra had come to his house alone due to Advaita's wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)