श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.9.37 
সর্ব-দিক্ অন্ধকার হৈল ধূলায
বাসায যাইতে কেহ পথ নাহি পায
सर्व-दिक् अन्धकार हैल धूलाय
वासाय याइते केह पथ नाहि पाय
 
 
अनुवाद
सभी दिशाएँ धूल से इतनी अंधकारमय हो गईं कि संन्यासियों को अपने निवास स्थान का रास्ता नहीं मिल सका।
 
All directions became so dark with dust that the monks could not find their way to their abode.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)