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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा
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श्लोक 331
श्लोक
3.9.331
সবে বুঝাইলেন ব্রহ্মার পাযে ধরি’
“পুত্রেরে কি গোসাঞি, এ-মত ক্রোধ করি?”
सबे बुझाइलेन ब्रह्मार पाये धरि’
“पुत्रेरे कि गोसाञि, ए-मत क्रोध करि?”
अनुवाद
वहां उपस्थित सभी लोगों ने ब्रह्मा के चरण पकड़ लिए और उन्हें शांत करते हुए कहा, “कृपया अपने पुत्र के प्रति इतना क्रूर मत बनो।”
All the people present there held the feet of Brahma and tried to calm him down saying, “Please do not be so cruel to your son.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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