श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 290
 
 
श्लोक  3.9.290 
সম্ভ্রমে উঠিযাশ্রী-অদ্বৈত মহাশয
ধরিলা প্রভুর হস্ত করিযা বিনয
सम्भ्रमे उठियाश्री-अद्वैत महाशय
धरिला प्रभुर हस्त करिया विनय
 
 
अनुवाद
श्री अद्वैत आचार्य तुरन्त उठ खड़े हुए और धीरे से भगवान का हाथ पकड़ लिया।
 
Sri Advaita Acharya immediately stood up and gently held the Lord's hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)