श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 276-277
 
 
श्लोक  3.9.276-277 
নিত্যানন্দ-তত্ত্ব কিবা অদ্বৈতের তত্ত্ব
যত মহাপ্রিয-ভক্ত-গোষ্ঠীর মহত্ত্ব
চৈতন্য-প্রভু সে সব করিলা প্রকাশে
সেই প্রভু সব ইহা কহেন সন্তোষে
नित्यानन्द-तत्त्व किबा अद्वैतेर तत्त्व
यत महाप्रिय-भक्त-गोष्ठीर महत्त्व
चैतन्य-प्रभु से सब करिला प्रकाशे
सेइ प्रभु सब इहा कहेन सन्तोषे
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य ने अत्यन्त प्रसन्न होकर नित्यानंद प्रभु, अद्वैत प्रभु तथा अपने अन्य प्रिय भक्त साथियों की महिमा का बखान किया।
 
Lord Chaitanya, being very pleased, praised the glories of Nityananda Prabhu, Advaita Prabhu and his other dear devotee companions.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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