श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 275
 
 
श्लोक  3.9.275 
যার যত কীর্তি ভক্তি-মহিমা উদার
শ্রী-চৈতন্য-চন্দ্র সে সব করযে প্রচার
यार यत कीर्ति भक्ति-महिमा उदार
श्री-चैतन्य-चन्द्र से सब करये प्रचार
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्यचन्द्र सदैव उनकी कीर्ति, भक्ति और उदारता का बखान करते रहते थे।
 
Sri Chaitanyachandra always spoke highly of his fame, devotion and generosity.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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