श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 260
 
 
श्लोक  3.9.260 
প্রভু বলে,—“শুন শুন আচার্য-গোসাঞি!
কলি-যুগে এমন বিরক্ত ঝাট নাই
प्रभु बले,—“शुन शुन आचार्य-गोसाञि!
कलि-युगे एमन विरक्त झाट नाइ
 
 
अनुवाद
तब भगवान ने कहा, "अद्वैत गोसाणी, कृपया सुनो। कलियुग में इन दोनों के समान त्यागी कोई व्यक्ति नहीं है।"
 
Then the Lord said, "Advaita Gosani, please listen. In Kaliyuga there is no person as renounced as these two."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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