श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.9.25 
অদ্বৈত বলেন,—“শুন কৃষ্ণদাসের মাতা!
তোমারে কহি যে আমি এক মনঃ-কথা
अद्वैत बलेन,—“शुन कृष्णदासेर माता!
तोमारे कहि ये आमि एक मनः-कथा
 
 
अनुवाद
अद्वैत ने कहा, "हे कृष्णदास की माता, सुनो। मैं तुम्हें बताता हूँ कि मैं क्या सोच रहा हूँ।"
 
Advaita said, "O mother of Krishnadasa, listen. I will tell you what I am thinking."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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