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श्लोक 3.9.209  |
যে নারিল লুকাইতে ক্ষীরোদ-সাগরে
লোকালযে আচ্ছাদন কিসে করি’ তাঙ্রে |
ये नारिल लुकाइते क्षीरोद-सागरे
लोकालये आच्छादन किसे करि’ ताङ्रे |
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| अनुवाद |
| “जब वह क्षीरसागर में नहीं छिप सका तो इस संसार में कैसे छिप सकता है? |
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| “When he could not hide in the Kshirsagar, how can he hide in this world? |
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