श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 201
 
 
श्लोक  3.9.201 
মহাবক্তাশ্রীনিবাস বলেন,—“গোসাঞি!
জীবের স্বতন্ত্র-শক্তি মূলে কিছু নাই
महावक्ताश्रीनिवास बलेन,—“गोसाञि!
जीवेर स्वतन्त्र-शक्ति मूले किछु नाइ
 
 
अनुवाद
वाक्पटु श्रीवास पंडित ने उत्तर दिया, “हे गोसांई, जीवात्मा के लिए कोई स्वतंत्रता नहीं है।
 
The eloquent Srivasa Pandit replied, “O Gosain, there is no freedom for the soul.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)