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श्लोक 3.9.184  |
তথাপিহ সবে অদ্বৈতের বল ধরি’
গাযেন নির্ভয হৈযা চৈতন্য শ্রী-হরি |
तथापिह सबे अद्वैतेर बल धरि’
गायेन निर्भय हैया चैतन्य श्री-हरि |
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| अनुवाद |
| फिर भी, अद्वैत के बल पर भक्तों ने निर्भय होकर भगवान चैतन्य की महिमा की। |
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| Nevertheless, on the strength of Advaita, the devotees fearlessly glorified Lord Chaitanya. |
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