श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 178
 
 
श्लोक  3.9.178 
কি অদ্ভুত হৈল সে কীর্তন-আনন্দ
সবে তাহা বর্ণিতে পারেন নিত্যানন্দ
कि अद्भुत हैल से कीर्तन-आनन्द
सबे ताहा वर्णिते पारेन नित्यानन्द
 
 
अनुवाद
उस कीर्तन का आनन्द अद्भुत था, वास्तव में केवल नित्यानंद ही उसका वर्णन कर सकते हैं।
 
The joy of that kirtan was amazing, indeed only Nityananda can describe it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)