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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा
»
श्लोक 164
श्लोक
3.9.164
তথাপি অদ্বৈত-বাক্য অলঙ্ঘ্য সবার
গাইতে লাগিল শ্রী-চৈতন্য-অবতার
तथापि अद्वैत-वाक्य अलङ्घ्य सबार
गाइते लागिल श्री-चैतन्य-अवतार
अनुवाद
फिर भी, अद्वैत के उपदेश की अवहेलना नहीं की जा सकती थी। इसलिए भक्तों ने भगवान चैतन्य की महिमा का गान करना शुरू कर दिया।
Nevertheless, the teachings of Advaita could not be ignored. So devotees began to sing the glories of Lord Chaitanya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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