श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  3.9.111 
বান্ধবের বার্তা যেন জিজ্ঞাসে বান্ধবে
’কহ বন্ধু-সব, কি কুশলে আছে সবে?’
बान्धवेर वार्ता येन जिज्ञासे बान्धवे
’कह बन्धु-सब, कि कुशले आछे सबे?’
 
 
अनुवाद
कभी-कभी एक व्यक्ति अपने मित्र से पूछता है, “कृपया मुझे बताओ, क्या हमारे मित्र कुशल मंगल हैं?”
 
Sometimes a person asks his friend, “Please tell me, is our friend well?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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