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श्लोक 3.9.103  |
দামোদর-মুখে শুনি’ আইর মহিমা
গৌরচন্দ্র প্রভুর আনন্দের নাহি সীমা |
दामोदर-मुखे शुनि’ आइर महिमा
गौरचन्द्र प्रभुर आनन्देर नाहि सीमा |
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| अनुवाद |
| दामोदर पंडित के मुख से माता शची की महिमा सुनकर भगवान गौरचन्द्र की प्रसन्नता असीम हो गई। |
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| Lord Gaurchandra was overjoyed to hear the glories of Mother Shachi from Damodar Pandit. |
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