श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.9.1 
জয জয শ্রী-কৃষ্ণ-চৈতন্য রমা-কান্ত
জয সর্ব-বৈষ্ণবের বল্লভ একান্ত
जय जय श्री-कृष्ण-चैतन्य रमा-कान्त
जय सर्व-वैष्णवेर वल्लभ एकान्त
 
 
अनुवाद
लक्ष्मीपति श्री कृष्ण चैतन्य की जय हो! समस्त वैष्णवों के एकमात्र प्रिय भगवान की जय हो!
 
All hail Sri Krishna Chaitanya, the Lord of all Vaishnavas!
तात्पर्य
श्री कृष्ण चैतन्यदेव ही कृष्ण स्वतः हैं, जो सभी अवतारों के स्रोत हैं अतः वे लक्ष्मी के पति विष्णु के भी मूल हैं. इसीलिए उनको रामकांता भी कहा जाता है. श्री कृष्ण चैतन्य, कृष्ण चंद्र हैं, जो शांत (तटस्थता), दास्य (सेवा), साख्य (भाईचारा), वात्सल्य (माता-पिता का स्नेह), और माधुर्य (पति-पत्नी का प्रेम) रसों के सभी भक्तों के पूजनीय भगवान हैं.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)