श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  3.8.95 
এই বর দেহ’ প্রভু করুণা-সাগর!”
পাদ-পদ্ম ধরি’ কান্দে সব অনুচর
एइ वर देह’ प्रभु करुणा-सागर!”
पाद-पद्म धरि’ कान्दे सब अनुचर
 
 
अनुवाद
“हे प्रभु, हे दया के सागर, कृपया हमें यह वरदान दीजिए!” भक्तों ने भगवान के चरण कमलों को पकड़ते हुए इस प्रकार पुकारा।
 
“O Lord, O Ocean of Mercy, please grant us this boon!” the devotees cried out, clasping the Lord’s lotus feet.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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