श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.8.87 
সর্ব-বৈষ্ণবেরে প্রভু ধরি’ জনে জনে
আলিঙ্গন করেন পরম-প্রীতি-মনে
सर्व-वैष्णवेरे प्रभु धरि’ जने जने
आलिङ्गन करेन परम-प्रीति-मने
 
 
अनुवाद
भगवान ने प्रत्येक वैष्णव को बड़े प्रेम से गले लगाया।
 
The Lord embraced each Vaishnava with great love.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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