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श्लोक 3.8.80  |
বৈষ্ণবের কি দায, অজ্ঞান যত জন
তাহারা ও ’হরি’ বলে করযে ক্রন্দন |
वैष्णवेर कि दाय, अज्ञान यत जन
ताहारा ओ ’हरि’ बले करये क्रन्दन |
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| अनुवाद |
| वैष्णवों की तो बात ही क्या, मूर्ख भी रोते और हरि का नाम जपते थे। |
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| Forget about Vaishnavas, even fools would cry and chant the name of Hari. |
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