श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  3.8.78 
আনন্দ অদ্বৈত-সিṁহ করেন হুঙ্কার
“আনিলুঙানিলুঙ্” বলি’ ডাকে বারবার
आनन्द अद्वैत-सिꣳह करेन हुङ्कार
“आनिलुङानिलुङ्” बलि’ डाके बारबार
 
 
अनुवाद
अत्यन्त प्रसन्नता से सिंहरूपी श्रीअद्वैत ने जोर से गर्जना की और बार-बार कहा, “मैं तुम्हें लाया हूँ! मैं तुम्हें लाया हूँ!”
 
Overjoyed, Sri Advaita, in the form of a lion, roared loudly and repeatedly said, "I have brought you! I have brought you!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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