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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल
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श्लोक 68
श्लोक
3.8.68
অশ্রু, কম্প, স্বেদ, মূর্চ্ছা, পুলক, হুঙ্কার
দণ্ডবত বৈ কিছু নাহি দেখি আর
अश्रु, कम्प, स्वेद, मूर्च्छा, पुलक, हुङ्कार
दण्डवत बै किछु नाहि देखि आर
अनुवाद
प्रेम के आंसू, कंपकंपी, पसीना, बेहोशी, रोंगटे खड़े होना, जोर से गर्जना, और प्रणाम करना, यही सब उस समय देखा जा सकता था।
Tears of love, shivering, sweating, fainting, goosebumps, loud roars, and prostrations, were all that could be seen at that time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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