श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  3.8.66 
দূরে অদ্বৈতেরে দেখি’ শ্রী-বৈকুণ্ঠ-নাথ
অশ্রু-মুখে করিতে লাগিলা দণ্ডপাত
दूरे अद्वैतेरे देखि’ श्री-वैकुण्ठ-नाथ
अश्रु-मुखे करिते लागिला दण्डपात
 
 
अनुवाद
जब वैकुण्ठ के भगवान ने दूर से अद्वैत आचार्य को देखा, तो उन्होंने आंखों में आंसू भरकर उन्हें प्रणाम किया।
 
When the Lord of Vaikuntha saw Advaita Acharya from a distance, he bowed to him with tears in his eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)