श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  3.8.44 
যে স্থানে রহেন আসি’ সবে বাসা করি’
সেই স্থান হয যেন শ্রী-বৈকুণ্ঠ-পুরী
ये स्थाने रहेन आसि’ सबे वासा करि’
सेइ स्थान हय येन श्री-वैकुण्ठ-पुरी
 
 
अनुवाद
मार्ग में जहाँ भी वे रुके, वह स्थान वैकुंठ के समान हो गया।
 
Wherever he stopped on the way, that place became like Vaikuntha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)