श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.8.42 
উল্লাসে যে হরি-ধ্বনি করে ভক্ত-গণ
শুনিযা পবিত্র হৈল ত্রিভুবন-জন
उल्लासे ये हरि-ध्वनि करे भक्त-गण
शुनिया पवित्र हैल त्रिभुवन-जन
 
 
अनुवाद
भक्तों द्वारा किया गया “हरि! हरि!” का कोलाहलपूर्ण स्पंदन सुनकर तीनों लोकों के लोग पवित्र हो गए।
 
The people of the three worlds became pure by hearing the noisy chanting of "Hari! Hari!" made by the devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)