श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.8.31 
হরিষে চলিলাশ্রী-আচার্য পুরন্দর
’বাপ’ বলি’ যাঙ্রে ডাকে শ্রী-গৌরসুন্দর
हरिषे चलिलाश्री-आचार्य पुरन्दर
’बाप’ बलि’ याङ्रे डाके श्री-गौरसुन्दर
 
 
अनुवाद
श्री आचार्य पुरंदर भी ख़ुशी से आये। श्री गौरसुंदर ने उन्हें पिता कहकर संबोधित किया।
 
Sri Acharya Purandara also came happily. Sri Gaurasundara addressed him as father.
तात्पर्य
देखें चैतन्य-भागवत, अन्त्य-खण्ड, पाँचवा अध्याय, श्लोक 15-17
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)