श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.8.18 
চলিলেন আঙ্খরিযাশ্রী-বিজয-দাস
’রত্নবাহু’ যাঙ্রে প্রভু করিল প্রকাশ
चलिलेन आङ्खरियाश्री-विजय-दास
’रत्नबाहु’ याङ्रे प्रभु करिल प्रकाश
 
 
अनुवाद
श्री विजयदास, लेखक जिन्हें भगवान ने रत्नबाहु [रत्नधारी] कहा था, भी आये।
 
Sri Vijayadasa, the writer whom the Lord called Ratnabahu [jewel bearer], also came.
तात्पर्य
देखें चैतन्य- भागवत, मध्य- खंड, अध्याय छब्बीस, टेक्स्ट 37-55।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)