श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  3.8.157 
যবে চলে সঙ্খ্যা-নাম করিযা গ্রহণ
তুলসী লৈযা অগ্রে চলে এক-জন
यबे चले सङ्ख्या-नाम करिया ग्रहण
तुलसी लैया अग्रे चले एक-जन
 
 
अनुवाद
जब भी भगवान सड़क पर चलते हुए जप करते थे, तो वे किसी को अपने आगे तुलसी का पौधा ले जाने को कहते थे।
 
Whenever the Lord chanted while walking on the road, he would ask someone to carry a Tulsi plant before him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)