श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 146
 
 
श्लोक  3.8.146 
দুই-দিকে সচল নিশ্চল জগন্নাথ
দেখি’ দেখি’ ভক্ত-গোষ্ঠী হয দণ্ডপাত
दुइ-दिके सचल निश्चल जगन्नाथ
देखि’ देखि’ भक्त-गोष्ठी हय दण्डपात
 
 
अनुवाद
भक्तों ने ब्रह्माण्ड के चल एवं अचल दोनों भगवानों को नमन किया।
 
The devotees bowed to both the moving and immovable gods of the universe.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)