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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल
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श्लोक 145
श्लोक
3.8.145
অদ্বৈতাদি-ভক্ত-গোষ্ঠী দেখেন সন্তোষে
কেবল আনন্দ-সিন্ধু-মধ্যে সবে ভাসে
अद्वैतादि-भक्त-गोष्ठी देखेन सन्तोषे
केवल आनन्द-सिन्धु-मध्ये सबे भासे
अनुवाद
अद्वैत प्रभु के नेतृत्व में सभी भक्तगण बड़ी संतुष्टि के साथ यह सब देख रहे थे और आनंद के सागर में तैर रहे थे।
All the devotees under the leadership of Advaita Prabhu were watching all this with great satisfaction and were swimming in the ocean of bliss.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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