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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल
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श्लोक 133
श्लोक
3.8.133
যত ’মহাজন’,—নাম সন্ন্যাসি-সকল
দেখিতে ও ভাগ্য কারো নহিল বিরল
यत ’महाजन’,—नाम सन्न्यासि-सकल
देखिते ओ भाग्य कारो नहिल विरल
अनुवाद
सभी तथाकथित महाजन और संन्यासी ऐसी लीलाओं को देखने में असमर्थ थे, क्योंकि वे कम भाग्यशाली थे।
All the so-called Mahajanas and Sanyasis were unable to see such Leelas, because they were less fortunate.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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