श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  3.8.128 
সেই জলে বিষযী, সন্ন্যাসী, ব্রহ্মচারী
সবেই আনন্দে ভাসে জল-ক্রীডা করি’
सेइ जले विषयी, सन्न्यासी, ब्रह्मचारी
सबेइ आनन्दे भासे जल-क्रीडा करि’
 
 
अनुवाद
संन्यासी, ब्रह्मचारी और गृहस्थ सभी नरेन्द्र-सरोवर के जल में क्रीड़ा करते थे और आनन्द की लहरों में तैरते थे।
 
Sanyasis, brahmacaris and householders all used to play in the waters of Narendra Sarovar and swim in the waves of joy.
तात्पर्य
विषयी शब्द गृहस्थाश्रम में भौतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों को संदर्भित करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)