श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  3.8.119 
বাহ্য নাহি কারো, সবে আনন্দে বিহ্বল
নির্ভযে ঈশ্বর-দেহে সবে দেন জল
बाह्य नाहि कारो, सबे आनन्दे विह्वल
निर्भये ईश्वर-देहे सबे देन जल
 
 
अनुवाद
आनंद में डूबे भक्तगण सब कुछ भूल गए और निर्भय होकर भगवान पर जल छिड़कने लगे।
 
The devotees, immersed in joy, forgot everything and fearlessly started sprinkling water on the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)