श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  3.8.118 
গোকুলের শিশু-ভাব হৈল সবার
প্রভু ও হৈলা গোকুলেন্দ্র-অবতার
गोकुलेर शिशु-भाव हैल सबार
प्रभु ओ हैला गोकुलेन्द्र-अवतार
 
 
अनुवाद
भक्तगण गोकुल के ग्वालबालों की भाव-भंगिमाओं में लीन हो गए और भगवान ने गोकुल के स्वामी कृष्ण की भाव-भंगिमाओं को स्वीकार कर लिया।
 
The devotees became absorbed in the expressions of the cowherd boys of Gokul and God accepted the expressions of Krishna, the lord of Gokul.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)