vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल
»
श्लोक 109
श्लोक
3.8.109
চতুর্-দিকে লোকের আনন্দ-অন্ত নাই
সব করেন করাযেন চৈতন্য-গোসাঞি
चतुर्-दिके लोकेर आनन्द-अन्त नाइ
सब करेन करायेन चैतन्य-गोसाञि
अनुवाद
भगवान चैतन्य ने स्वयं अनंत सुख का आनंद लिया और उस सुख को चारों दिशाओं में सभी को वितरित किया।
Lord Chaitanya himself enjoyed infinite happiness and distributed that happiness to everyone in all four directions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×