श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  3.8.109 
চতুর্-দিকে লোকের আনন্দ-অন্ত নাই
সব করেন করাযেন চৈতন্য-গোসাঞি
चतुर्-दिके लोकेर आनन्द-अन्त नाइ
सब करेन करायेन चैतन्य-गोसाञि
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य ने स्वयं अनंत सुख का आनंद लिया और उस सुख को चारों दिशाओं में सभी को वितरित किया।
 
Lord Chaitanya himself enjoyed infinite happiness and distributed that happiness to everyone in all four directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)