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श्लोक 3.8.105  |
মহা-জয-জয-শব্দ, মহা-হরি-ধ্বনি
ইহা বৈ আর কোন শব্দ নাহি শুনি |
महा-जय-जय-शब्द, महा-हरि-ध्वनि
इहा बै आर कोन शब्द नाहि शुनि |
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| अनुवाद |
| “जय! जय!” और “हरि! हरि!” के उच्च स्वर में किये जाने वाले जाप के अतिरिक्त कोई ध्वनि सुनाई नहीं दे रही थी। |
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| There was no sound to be heard except the loud chanting of "Jai! Jai!" and "Hari! Hari!" |
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