vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल
»
श्लोक 100
श्लोक
3.8.100
হেন সে হৈল প্রেম-ভক্তির প্রকাশ
হেন নাহি দেখি যার না হয উল্লাস
हेन से हैल प्रेम-भक्तिर प्रकाश
हेन नाहि देखि यार ना हय उल्लास
अनुवाद
वहां परमानंद प्रेम की ऐसी अभिव्यक्ति थी कि एक भी व्यक्ति दुखी नहीं था।
There was such an expression of ecstatic love that not a single person was unhappy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×