श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 8: महाप्रभु के नरेंद्र सरोवर में जल खेल  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  3.8.100 
হেন সে হৈল প্রেম-ভক্তির প্রকাশ
হেন নাহি দেখি যার না হয উল্লাস
हेन से हैल प्रेम-भक्तिर प्रकाश
हेन नाहि देखि यार ना हय उल्लास
 
 
अनुवाद
वहां परमानंद प्रेम की ऐसी अभिव्यक्ति थी कि एक भी व्यक्ति दुखी नहीं था।
 
There was such an expression of ecstatic love that not a single person was unhappy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)