श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  3.7.99 
ইতি-মধ্যে বিশেষ আছযে দুই প্রতি
নিত্যানন্দ-অদ্বৈতেরে না ছাডেন স্তুতি
इति-मध्ये विशेष आछये दुइ प्रति
नित्यानन्द-अद्वैतेरे ना छाडेन स्तुति
 
 
अनुवाद
फिर भी भगवान चैतन्य को नित्यानंद प्रभु और अद्वैत आचार्य पर विशेष स्नेह था। वे उनका गुणगान करने में कभी नहीं हिचकिचाते थे।
 
Nevertheless, Lord Chaitanya had special affection for Nityananda Prabhu and Advaita Acharya. He never hesitated to sing their praises.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)