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श्लोक 3.7.91  |
কৃষ্ণের কৃপায সবে আনন্দে বিহ্বল
কখনো কখনো বাজে আনন্দ-কন্দল |
कृष्णेर कृपाय सबे आनन्दे विह्वल
कखनो कखनो बाजे आनन्द-कन्दल |
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| अनुवाद |
| कृष्ण की कृपा से सभी लोग दिव्य सुख से अभिभूत थे, फिर भी कभी-कभी गौरचन्द्र और नित्यानंद के बीच भी प्रेमपूर्ण झगड़े हो जाते थे। |
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| By the grace of Krishna, everyone was overwhelmed with transcendental happiness, yet sometimes even Gaurachandra and Nityananda had loving quarrels. |
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