श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  3.7.86 
গোপ-গোপী-ভক্তি—সব তপস্যার ফল
যাহা বাঞ্ছে ব্রহ্মা, শিব ঈশ্বর-সকল
गोप-गोपी-भक्ति—सब तपस्यार फल
याहा वाञ्छे ब्रह्मा, शिव ईश्वर-सकल
 
 
अनुवाद
वृन्दावन के गोप-गोपियों द्वारा प्राप्त भक्ति महान तपस्या का फल है। ब्रह्मा, शिव तथा अन्य महापुरुष भी उस पद की कामना करते हैं।
 
The devotion attained by the cowherds and cowherdesses of Vrindavan is the fruit of great austerities. Brahma, Shiva, and other great men also aspire to that position.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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