श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  3.7.8-9 
গোপ-শিশু-গণ-সঙ্গে প্রতি-ঘরে ঘরে
যেন ক্রীডা করিলেন গোকুল-নগরে
সেই-মত গোকুলের আনন্দ প্রকাশি’
কীর্তন করেন নিত্যানন্দ সুবিলাসী
गोप-शिशु-गण-सङ्गे प्रति-घरे घरे
येन क्रीडा करिलेन गोकुल-नगरे
सेइ-मत गोकुलेर आनन्द प्रकाशि’
कीर्तन करेन नित्यानन्द सुविलासी
 
 
अनुवाद
जैसे नित्यानंद पहले गोकुल में ग्वालबालों के साथ घर-घर जाकर क्रीड़ा करते थे, उसी प्रकार उन्होंने कीर्तन करते समय उन आनंदमय गोकुल लीलाओं को प्रकट किया।
 
Just as Nityananda used to play from house to house with the cowherd boys in Gokul, in the same way, while singing kirtan, he revealed those blissful Gokul pastimes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)