श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.7.79 
সুকোমল দুর্বিজ্ঞেয ঈশ্বর হৃদয
বেদ-শাস্ত্রে ব্রহ্মা, শিব সব এই কয
सुकोमल दुर्विज्ञेय ईश्वर हृदय
वेद-शास्त्रे ब्रह्मा, शिव सब एइ कय
 
 
अनुवाद
परमेश्वर का हृदय अत्यंत कोमल और समझने में कठिन है। इसकी पुष्टि वैदिक साहित्य में ब्रह्मा और शिवजी ने भी की है।
 
The heart of God is extremely delicate and difficult to understand. This is confirmed by Brahma and Shiva in Vedic literature.
तात्पर्य
उत्तरा रामा-चरित (3.23) में कहा गया है:

वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि

लोकत्तराणां चेतसि को हि विज्ञातुमईश्वरः

"साधारण व्यवहार से ऊपर उठे हुओं के हृदय कभी वज्र से भी कठोर होते हैं और कभी फूल से भी कोमल। ऐसे महान व्यक्तियों में विरोधाभास को कौन समझ सकता है?"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)