|
| |
| |
श्लोक 3.7.77  |
নিত্যানন্দ-স্বরূপ ও প্রভু-ইচ্ছা জানি’
একান্তে সে আসিযা দেখেন ন্যাসি-মণি |
नित्यानन्द-स्वरूप ओ प्रभु-इच्छा जानि’
एकान्ते से आसिया देखेन न्यासि-मणि |
| |
| |
| अनुवाद |
| भगवान चैतन्य की इच्छा को जानते हुए, नित्यानन्द स्वरूप सदैव उनसे अकेले में मिलते थे। |
| |
| Knowing Lord Chaitanya's wish, Nityananda Swarup always met Him alone. |
| ✨ ai-generated |
| |
|