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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ
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श्लोक 66
श्लोक
3.7.66
ইহা দেখি’ যে সুকৃতি চিত্তে পায সুখ
সে অবশ্য দেখিবে কৃষ্ণের শ্রী-মুখ
इहा देखि’ ये सुकृति चित्ते पाय सुख
से अवश्य देखिबे कृष्णेर श्री-मुख
अनुवाद
“जो भाग्यशाली व्यक्ति इन विषयों को सुनने में आनंद लेता है, वह निश्चित रूप से कृष्ण के सुंदर चेहरे को देखेगा।
“The fortunate person who enjoys listening to these topics will certainly see the beautiful face of Krishna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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