श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.7.60 
শ্রবণ-কীর্তন-স্মরণাদি নমস্কার
এই সে তোমার সর্ব-কাল অলঙ্কার
श्रवण-कीर्तन-स्मरणादि नमस्कार
एइ से तोमार सर्व-काल अलङ्कार
 
 
अनुवाद
“आपका शरीर श्रवण, कीर्तन, स्मरण और नमस्कार जैसे आभूषणों से सदैव सुशोभित है।
 
“Your body is always adorned with ornaments like hearing, chanting, remembering and saluting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)