श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.7.6 
হেন-মতে নিত্যানন্দ নবদ্বীপ-পুরে
বিহরেন প্রেম-ভক্তি-আনন্দ-সাগরে
हेन-मते नित्यानन्द नवद्वीप-पुरे
विहरेन प्रेम-भक्ति-आनन्द-सागरे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार नित्यानंद ने नवद्वीप में रहते हुए भगवान के परमानंद प्रेम के सागर में आनंद लिया।
 
Thus Nityananda, while living in Navadvipa, enjoyed the ocean of the Lord's ecstatic love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)