श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.7.54 
তাড, খাডু, বেত্র, বṁশী, শিঙ্গা, ছান্দ-দডি
ইহা ধরিলাঙ আমি মুনি-ধর্ম ছাডি’
ताड, खाडु, वेत्र, वꣳशी, शिङ्गा, छान्द-दडि
इहा धरिलाङ आमि मुनि-धर्म छाडि’
 
 
अनुवाद
“मैंने भिक्षुक का कर्तव्य त्याग दिया और कंगन, पायल, एक छड़ी, एक बांसुरी, एक भैंस का सींग और एक रस्सी स्वीकार कर ली।
 
“I gave up the duties of a mendicant and accepted bracelets, anklets, a stick, a flute, a buffalo horn and a rope.
तात्पर्य
परमेश्वर श्री नित्यानंद प्रभु ने विविध प्रकार के अनूठे मनोरंजन को पालने के लिए एक दंड स्वीकार किया। फिर भी, श्री गौरसुंदर ने उन्हें वह दंड छोड़ने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार उन्होंने एक तपस्वी के सिद्धांतों को त्याग दिया और कृष्ण की सेवा के लिए आवश्यक सामग्री को स्वीकार किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)