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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ
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श्लोक 51
श्लोक
3.7.51
কোন্ বা বক্তব্য প্রভু, আছে তোমা-স্থানে
কিবা নাহি দেখ তুমি দিব্য-দরশনে
कोन् वा वक्तव्य प्रभु, आछे तोमा-स्थाने
किबा नाहि देख तुमि दिव्य-दरशने
अनुवाद
"हे प्रभु, मैं आपसे क्या कहूँ? आप तो अपनी दिव्य आँखों से सब कुछ देखते हैं।
"O Lord, what can I say to you? You see everything with your divine eyes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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