श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री गदाधर के बगीचे में लीलाएँ  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.7.50 
প্রদক্ষিণ কর, কিবা কর নমস্কার
কিবা মার, কিবা রাখ, যে ইচ্ছা তোমার
प्रदक्षिण कर, किबा कर नमस्कार
किबा मार, किबा राख, ये इच्छा तोमार
 
 
अनुवाद
“तुम अपनी इच्छानुसार मेरी परिक्रमा कर सकते हो, मुझे प्रणाम कर सकते हो, मुझे मार सकते हो या मेरी रक्षा कर सकते हो।
 
“You can circumambulate me, bow to me, kill me or protect me as you wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)